WRIT
रिट
यदि नागरिको के मूल अधिकार को राज्य द्वारा उलंघन किया जाता है तो नागरिको को उच्च न्यायालय या उचतम न्यायालय में याचिका दायर करने का अधिकार संबिधान में दिया गया है |
राज्य के विरुद्ध यह याचिका रित याचिका कहलाती है | याचिका सही पाये जानी पर न्यायलय रित जरी करती है | भारतीय संबिधान के भाग तिन में मूल अधिकारों का वर्णन है | संबिधान के सेक्शन 32 के अन्तर्गत सुप्रीम कोर्ट में तथा संबिधान के सेक्शन 226 के आधार पर हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर किया जा सकता है |
रिट के प्रकार (TYPE OF RIT )
1.बंदी प्रत्यक्षीकरण (HABEAS CORPUS ),
यह रिट उस अधिकारी के विरुद्ध दायर कि जाती है जो किसी को बंदी बनाकर रखता है |
2.परमादेश रिट (MANDAMUS),
किसी लोक अधिकारी या अधीनस्थ न्यायालय के विरुद्ध |
3. प्र्तिसेध रिट (PROHIBITION)
उच्तर न्यायलय द्वार अधीनस्थ न्यायलय के विरुद्ध |
4.उत्प्रेषण लेख(WRIT OF CERTIORARI )
उच्चतर न्यायालय द्वारा अधीनस्थ न्यायालय में चल रही मुकदमो कि समीक्षा|
5. अधिकार पृच्छा(QUO WARRANTO )
लोक अधिकारी के विरुद्ध जो उस पद के लायक नहीं है तथा लोक अधिकारी को अपने आदेश क्षेत्र से बहार जाकर अपने आदेश देने से रोका जाता है |
लेबल: CRPC


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